बच्चन जी की बात ही कुछ और थी
बच्चन जी की बात ही कुछ और थी - प्रदीप सरदाना यूँ हमारे देश में एक से एक साहित्यकार और कवि हुए हैं । लेकिन मैं जिन्हें सबसे अधिक याद करता हूँ वह है डॉ हरिवंशराय बच्चन। बच्चन जी को इस लोक से विदा हुए अब 17 बरस बीत गए हैं । लेकिन शायद ही कोई दिन ऐसा गुजरा हो जिस दिन मैंने उन्हें याद न किया हो। नवम्बर का महीना आते ही तो जिस तारीख पर मेरा ध्यान सबसे पहले जाता है वह है 27 नवम्बर। बच्चन जी की यह जन्म तिथि मेरे लिए सन 1976 से ही विशेष हो गयी थी , जब मैं बच्चन जी के जन्म दिन पर पहली बार शामिल हुआ था। उस समय मैं एक किशोर था , सीनियर सेकेंड्री भी पास नहीं किया था । लेकिन बच्चन जी ने मुझे अपने जन्म दिन पर वैसा ही सम्मान दिया जैसा वह अपने यहाँ आये प्रमुख साहित्यकारों , कवियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को दे रहे थे। जबकि मुझे उनसे मिले कुछ ही समय हुआ था। यह देख मैं गद गद हो गया था कि इतने बड़े , लोकप्रिय और सम्मानित व्यक्ति मुझ जैसे लगभग अंजान और साधारण प्राणी को इतना सम्मान और प्यार दे रहे हैं। बच्चन जी से मेरी पहली मुलाकात भी सन 1976 में ही हुई थी। मैं उनकी कविताओं खास तौर से ‘ म...