राज कपूर की 'ड्रीम' फिल्म- 'मेरा नाम जोकर' के 50 साल , 'लोकमत समाचार' में 18 दिसम्बर 2020 को प्रकाशित मेरा लेख
- प्रदीप सरदाना वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘ मेरा नाम जोकर ’ एक ऐसी फिल्म है जिसे आज पूरे विश्व में एक कालजयी और भव्य फिल्म के रूप में बहुत सराहा जाता है। लेकिन जब यह फिल्म 18 दिसंबर 1970 को पहली बार प्रदर्शित हुई थी तो दर्शकों ने इसे पूरी तरह नकार दिया था। जबकि राज कपूर ने ‘ मेरा नाम जोकर ’ को कुछ उसी शिद्दत से बनाया था , जैसे के आसिफ ने ‘ मुगल-ए- आजम ’ बनाई थी। लेकिन ‘ मुगल-ए-आजम ’ ने कमाई के मामले में तो सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए ही , आज भी देश की सबसे खूबसूरत फिल्म के रूप में इसे याद किया जाता है। लेकिन ‘ मेरा नाम जोकर ’ रिलीज के समय ऐसे औंधे मुंह गिरि कि राज कपूर का आरके स्टूडियो और उनका घर ही नहीं उनकी पत्नी कृष्णाराज के गहने तक गिरवी रखने पड़े। राजकपूर आकंठ कर्ज से डूब गए। लोगों ने कहा , अब राज कपूर खत्म , उनका ज़माना गया। इससे राज कपूर का दिल ऐसे ही चकनाचूर हो गया जैसे फिल्म में जोकर राजू का दिल टूटता है लेकिन राज कपूर ने फिर खड़े हुए और ‘ बॉबी ’ बनाकर फिर वैसी सफलता पाई , जिसके लिए वह जाने जाते थे।...