तलाक का दर्द तुम क्या जानो आमिर बाबू ....
किरण को देश से डर लगता था या आमिर से - प्रदीप सरदाना वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक क्या मिलिये ऐसे लोगों से , जिनकी फितरत छुपी रहे , नकली चेहरा सामने आए , असली सूरत छुपी रहे। दिलदारी का ढोंग रचाकर , जाल बिछाये बातों का , जीते जी का रिश्ता कहकर , सुख ढूंढे कुछ रातों का , रूह की हसरत लब पर आए , जिस्म की हसरत छुपी रहे। जिनकी आधी नीयत उभरे , आधी नीयत छुपी रहे। जब से आमिर खान ने अपनी दूसरी पत्नी किरण राव को तलाक देने की घोषणा की है , मुझे फिल्म ‘ इज्ज़त ’ के उपरोक्त गीत की ये पंक्तियाँ बार बार याद आ रही हैं। ये पंक्तियाँ आमिर खान पर एक दम सटीक बैठती हैं। यूं किसी का किसी से शादी करने या तलाक लेने का मामला व्यक्तिगत है। लेकिन आमिर ने खुद ही अपने इस तलाक को सार्वजनिक करके , अपनी बेहतर छवि बनाने का प्रयास किया है। यह बात अलग है कि इस मामले से उनकी छवि बेहतर होने की जगह धूमिल हो गयी। उनके नकली चेहरे के पीछे छिपा असली चेहरा सामने आ गया है। गत 3 जुलाई को सुबह मेरे व्हाट्सएप पर जब आमिर खान और किरण राव के ‘ संयुक्त बयान ’ के रूप में , उनके तलाक...