भारत ही नहीं विश्व आराध्य हैं भगवान श्रीराम
- प्रदीप सरदाना वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक भारतीय संस्कृति में विजयदशमी और दीपावली के पर्व सदियो से मनाये जाते रहे हैं । असत्य पर सत्य की विजय का पर्व विजयदशमी आज भी इस बात को बल देता है कि असत्य चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो , लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है। ऐसे ही दीपावली बताती है कि अँधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दिन उजाला होगा ही । इंसान भरसक प्रयास करे तो अमावस्या की काली अँधेरी रात को उज्ज्वल कर सकता है, प्रकाशमय कर सकता है । विजयदशमी-दीपावली के ये प्राचीन संदेश यूं तो सदा ही प्रासंगिक रहे हैं । हर समय ऐसे असंख्य उदाहरण मिल जाएँगे जब सत्य पर असत्य हावी होता दिखाई देता है , लेकिन तभी कुछ न कुछ ऐसा घटित होता है कि अंत में सत्य ही जीतता है। लेकिन इस बार यह सदेश और भी अहम है। क्योंकि इस बार कोरोना रूपी राक्षस पूरे विश्व में नित हजारों ज़िंदगियों को काल का ग्रास बना रहा है। ऐसे में इस संदेश से सभी को बल मिलता है उम्मीद बंधती है कि कोरोना का अंत होकर रहेगा। हम निश्चय ही जल्द इस रावण , इस बुराई को नष्ट करने में सफल होंगे और अंधकार को चीरते हुए प...