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फिल्म संसार के सबसे बेहतर गीतकार थे शैलेंद्र

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 -  प्रदीप सरदाना वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक   तू ज़िंदा है तो जिंदगी की जीत पर यकीन कर। अगर कहीं स्वर्ग है तो उतार ला ज़मीन पर। रात और दिन दिया जले मेरे मन में फिर भी अँधियारा है। रात के हम सफर थक के घर को चले। किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार , किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार , ज़ीना इसी का नाम है। ये सभी लोकप्रिय गीत यूं तो हिन्दी फिल्मों के अमर गीत हैं। लेकिन इन गीतों के शब्द दुनिया भर के लोगों के सपनों , प्रेम , दर्द और संघर्ष को दर्शाने के साथ उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित भी करते हैं। इन और इन जैसे कितने ही खूबसूरत गीत लिखने वाले शैलेंद्र का आज जन्म दिन है। आज यदि वह होते तो 98 बरस के होते। लेकिन सिनेमा के सबसे बेहतर गीतकार माने जाने वाले शैलेंद्र ने 14 दिसंबर 1966 को सिर्फ 43 बरस की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। 30 अगस्त 1923 को रावलपिंडी में जन्मे शैलेंद्र का असली नाम शंकर दास था। जब इनके पिता फौज से रिटायर हुए तो ये मथुरा आ गए। मथुरा की   धौली प्याऊ गली और रेलवे स्टेशन के किनारे बैठकर इनके कव...

शब्दों के जादूगर की अनुपम यात्रा (पुस्तक समीक्षा - तू प्यार का सागर है)

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दिल का हाल सुने दिल वाला , सीधी सी बात न मिर्च मसाला  - प्रदीप सरदाना  आज से सौ साल बाद भी जब कभी फिल्म गीतकारों की बात उठेगी , तब भी शैलेंद्र का नाम इज्ज़त से लिया जाएगा। क्या इन गीतों को कोई भुला सकता है- ‘ आवारा हूँ , जिस देश में गंगा बहती है , मुझे तुमसे से कुछ भी न चाहिए। जन जन के लोकप्रिय गीतकार शैलेंद्र को लेकर उपरोक्त बात , सुप्रसिद्द गायक मुकेश ने ,‘ धर्मयुग ’ के 8 जनवरी 1967 के अंक में प्रकाशित , अपने एक लेख –आवारा था , गर्दिश में था , आसमान का तारा था ’ में लिखी थी। शैलेंद्र के गीतों को अपने सुरों से अमर कर देने वाले मुकेश तब बुरी तरह टूट गए थे जब 14 दिसंबर 1966 को शैलेंद्र अचानक इस दुनिया को अलविदा कह गए। मुकेश के इस लेख के साथ और भी कई ऐसे लेख हाल ही में आई पुस्तक – ‘ गीतकार शैलेंद्र-तू प्यार का सागर है ’ में प्रकाशित हुए हैं , जो शैलेंद्र के गीतों की ही नहीं ज़िंदगी के भी विभिन्न रंगों की खूबसूरत बानगी प्रस्तुत करते हैं। इन विभिन्न लेखों को पुस्तक में अपने सम्पादन में सलीके से सँजोया है जाने माने माने लेखक और फिल्मों के अच्छे जानकार इंद्रजीत सिंह...

रूस में आज भी गूँजते हैं राज कपूर, मुकेश और शैलेंद्र के गीत

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रूस में आज भी गूँजते हैं राज कपूर, मुकेश और शैलेंद्र के गीत  - प्रदीप सरदाना  वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक  महान फ़िल्मकार राज कपूर भारतीय सिनेमा के ऐसे पहले अभिनेता रहे जिनकी लोकप्रियता देश की सरहदों को पार करते हुए दुनिया के कई देशों में पहुंची। जिनमें रूस तो ऐसा देश रहा जहां राज कपूर घर घर में लोकप्रिय हो गए थे। राज कपूर को रूस में जिस फिल्म ने सबसे पहले जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई , वह फिल्म थी  ‘ आवारा ’ । सन 1951 में बनी  ‘ आवारा ’  से राज कपूर तो रूस में लोकप्रिय हुए ही। साथ ही इस फिल्म में शैलेंद्र के लिखे गीत  ‘ आवारा हूँ ’  ने भी ऐसी धूम मचाई कि मुकेश के गाये इस गीत का जादू ,  वहाँ आज तक बरकरार है। आज बरसों बाद भी ,  रूस में राज कपूर , मुकेश और शैलेंद्र के गीत गूंज रहे हैं। इसकी हालिया मिसाल यह है कि गत  14  दिसम्बर   को   राज कपूर के 96 वें जन्म दिन पर मॉस्को में   हिंदुस्तानी समाज रूस और जवाहरलाल नेहरु सांस्कृतिक केंद्र मॉस्को द्वारा "एक शाम राज कपूर और गीतकार शैलेन्द्र के नाम"   का आयोजन किया...

राज कपूर की 'ड्रीम' फिल्म- 'मेरा नाम जोकर' के 50 साल , 'लोकमत समाचार' में 18 दिसम्बर 2020 को प्रकाशित मेरा लेख

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  -  प्रदीप सरदाना  वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक  भारतीय सिनेमा के इतिहास में ‘ मेरा नाम जोकर ’ एक ऐसी फिल्म है जिसे आज पूरे विश्व में एक कालजयी और भव्य फिल्म के रूप में बहुत सराहा जाता है। लेकिन जब यह फिल्म 18 दिसंबर 1970 को पहली बार प्रदर्शित हुई थी तो दर्शकों ने इसे पूरी तरह नकार दिया था। जबकि राज कपूर ने ‘ मेरा नाम जोकर ’ को कुछ उसी शिद्दत से बनाया था , जैसे के आसिफ ने ‘ मुगल-ए- आजम ’ बनाई थी। लेकिन ‘ मुगल-ए-आजम ’ ने कमाई के मामले में तो सफलता के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त किए ही , आज भी देश की सबसे खूबसूरत फिल्म के रूप में इसे याद किया जाता है। लेकिन ‘ मेरा नाम जोकर ’ रिलीज के समय ऐसे औंधे मुंह गिरि कि राज कपूर का आरके स्टूडियो और उनका घर ही नहीं उनकी पत्नी कृष्णाराज के गहने तक गिरवी रखने पड़े। राजकपूर आकंठ कर्ज से डूब गए। लोगों ने कहा , अब राज कपूर खत्म , उनका ज़माना गया। इससे राज कपूर का दिल ऐसे ही चकनाचूर हो गया जैसे फिल्म में जोकर राजू का दिल टूटता है लेकिन राज कपूर ने फिर खड़े हुए और ‘ बॉबी ’ बनाकर फिर वैसी सफलता पाई , जिसके लिए वह जाने जाते थे।...