शब्दों के जादूगर की अनुपम यात्रा (पुस्तक समीक्षा - तू प्यार का सागर है)

दिल का हाल सुने दिल वाला, सीधी सी बात न मिर्च मसाला 

- प्रदीप सरदाना 

आज से सौ साल बाद भी जब कभी फिल्म गीतकारों की बात उठेगी,तब भी शैलेंद्र का नाम इज्ज़त से लिया जाएगा। क्या इन गीतों को कोई भुला सकता है-आवारा हूँ, जिस देश में गंगा बहती है, मुझे तुमसे से कुछ भी न चाहिए।

जन जन के लोकप्रिय गीतकार शैलेंद्र को लेकर उपरोक्त बात,सुप्रसिद्द गायक मुकेश ने,‘धर्मयुग के 8 जनवरी 1967 के अंक में प्रकाशित,अपने एक लेख –आवारा था, गर्दिश में था, आसमान का तारा था में लिखी थी। शैलेंद्र के गीतों को अपने सुरों से अमर कर देने वाले मुकेश तब बुरी तरह टूट गए थे जब 14 दिसंबर 1966 को शैलेंद्र अचानक इस दुनिया को अलविदा कह गए।

मुकेश के इस लेख के साथ और भी कई ऐसे लेख हाल ही में आई पुस्तक –गीतकार शैलेंद्र-तू प्यार का सागर है में प्रकाशित हुए हैं,जो शैलेंद्र के गीतों की ही नहीं ज़िंदगी के भी विभिन्न रंगों की खूबसूरत बानगी प्रस्तुत करते हैं।

इन विभिन्न लेखों को पुस्तक में अपने सम्पादन में सलीके से सँजोया है जाने माने माने लेखक और फिल्मों के अच्छे जानकार इंद्रजीत सिंह ने। जो पेशे से एक शिक्षक हैं लेकिन इससे पहले भी इंद्रजीत की शैलेंद्र पर दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस पुस्तक में शैलेंद्र को लेकर कुल 36 लेख हैं। इंद्रजीत इसके लिए बधाई के पात्र हैं कि वह इसमें जहां साहित्यकारों, कवियों और गीतकारों के लेख समाहित कर सके। तो फिल्म समीक्षकों,आलोचकों के भी। साथ ही शैलेंद्र के परिवार, उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़े कुछ व्यक्तियों ने भी पुस्तक में शैलेंद्र पर जी भर कर लिखा है। इससे पाठक शैलेंद्र की गीत यात्रा के साथ उनके जीवन और जीवन दर्शन के बारे में बहुत सी ऐसी बातों को भी गहराई से समझ सकेंगे,जो पहले कहीं और प्रकाश में नहीं आयीं।

पुस्तक में विश्वनाथ त्रिपाठीस्वयं प्रकाशलीलाधर मंडलोईऋतुराजविट्ठलभाई पटेललाल बहादुर वर्माकमलेश पांडेयमनमोहन चड्ढायतीन्द्र मिश्र, राजीव श्रीवास्तवबीआर इशारापंडित किरण मिश्र,प्रसून जोशी,स्वानन्द किरकिरे,ब्रज भूषण तिवारी,रवि भूषण,पुनीत बिसारिया,नलिन विकास,प्रदीप जिलवाने,ज़ाहिद खान,दीप भट्ट,ईशमधु तलवार,किशोर कुमार कौशल,किशन शर्मा,रमेश चौबे और डॉ संदीप भगत के लेख तो अत्यंत प्रशंसनीय हैं।

विश्वनाथ त्रिपाठी ने शैलेंद्र को हिन्दी फिल्मों का सबसे बड़ा गीतकार माना है। तो विट्ठलभाई ने शैलेंद्र के गीतों में तुलसी,सूर,मीरा की मार्मिकता और ज्ञान की बात कही है। जबकि राजीव श्रीवास्तव ने शैलेंद्र को कबीर की अगली कड़ी बताया है। उधर राज कपूर तो शैलेंद्र की तुलना रूस के महान कवि पुश्किन से करते थे।

मेरे द्वारा की गई उपरोक्त पुस्तक समीक्षा प्रसिद्द समाचार पत्र 'दैनिक ट्रिब्यून' में 31 जनवरी 2021 के सभी संस्करण में प्रकाशित हुई है। 

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