देश की 130 करोड़ आबादी में आज 13 बड़े जादूगर नहीं हैं –जादूगर सम्राट शंकर
- प्रदीप सरदाना
वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक
जादूगर सम्राट शंकर पिछले 45 बरसों से देश-दुनिया में अपने जादुई शो कर रहे हैं। यूं तो आज देश में ऐसे दो-चार बड़े जादूगर ही रह गए हैं, जो अपने भरे पूरे काफिले के साथ मंच पर अपनी विशाल प्रस्तुति करते हैं। लेकिन सम्राट शंकर के शो की भव्यता का तो आज कोई और सानी नहीं। अपने दो घंटे के शो में शंकर रहस्य, रोमांच औए मनोरंजन का ऐसा ताना बाना बुनते हैं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो किसी स्वप्न लोक में पहुँच जाते हैं। उनके शो में एक खास बात यह भी है कि वह अपने मनोरंजक जादू के साथ सामाजिक शिक्षा और जनजागरण के संदेश भी नियमित देते हैं।
फिर सम्राट शंकर देश के अकेले
ऐसे जादूगर हैं जिनके शो देश के विभिन्न राष्ट्रपति,
उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अनेक केन्द्रीय मंत्री तो
देख ही चुके हैं। साथ ही सन 1980 के बाद से हरियाणा, हिमाचल
प्रदेश, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों के अब तक के अधिकांश
राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी उनका शो देख चुके हैं और कई बड़े फिल्म सितारे भी। अपनी
इन सभी विशेषताओं के कारण वह आज देश के नंबर वन और सर्वाधिक लोकप्रिय जादूगर के
रूप में विख्यात हैं।
हरियाणा के एलनाबाद में 6
सितम्बर 1950 को जन्मे जादूगर सम्राट शंकर से हाल ही में एक विशेष बातचीत हुई। उसी
बातचीत के प्रमुख अंश यहाँ प्रस्तुत हैं-
बिलकुल कोरोना के कारण हम
करीब 10 महीने से मंच पर कोई भी अपने शो नहीं कर पा रहे हैं। मनोरंजन के नए नए
साधन आने के कारण हमारी प्राचीन जादुई कला पहले ही काफी संकटों से जूझ रही थी। अब
कोरोना की विश्व आपदा ने तो हमारी कमर पूरी तरह तोड़ दी है। हमारे जादुई शो में
करीब 40 लोग होते हैं, इससे हम सभी के लिए यह एक बड़े संकट
का समय है। लेकिन हम समय की नज़ाकत को समझते हुए काफी धैर्य से काम ले रहे हैं।
लगता है
इन दिनों तो आप जादू की नयी नयी ट्रिक बना रहे होंगे, काफी लंबा समय मिल गया आपको घर बैठने का ?
(हँसते हुए) जी पहली बार
ज़िंदगी में लगातार इतना समय घर परिवार के साथ मिला है। पर मैंने इस समय का भरपूर
सदुपयोग किया है। हमारे पिछले स्टेज शो हरियाणा सरकार की ओर से गीता महोत्सव, कुरुक्षेत्र में हुए थे और फिर हिमाचल में थे। गत जनवरी में ही मैंने दूरदर्शन
और आकाशवाणी दिल्ली के लिए अपने शो और इंटरव्यू किए। उसके बाद मार्च से मैं विभिन्न
न्यूज़ चैनल्स पर अपने विभिन्न जादू दिखाकर लोगों को घर में रहने का सदेश देकर ‘कोरोना वारियर’ के रूप में सक्रिय रहा हूँ। जबकि हाल
ही में मैंने अपनी इस जादुई विरासत और बरसों की साधना को एक ‘मैजिक बॉक्स’ के रूप में विकसित कर, देश को समर्पित किया है। जिससे सभी इस प्राचीन कला को समझ, खुद भी जादू के खेल दिखा सकते हैं।
मेरा मानना है कि कला कोई भी हो उसे लोगों के साथ साझा करते रहना चाहिए। कला, शिक्षा और प्रेम जितना बांटो उतना बढ़ते हैं। मुझे यह देख दुख होता है कि हमारे देश की 130 करोड़ की आबादी में आज 13 बड़े जादूगर नहीं हैं। जबकि हमारी यह कला विश्व के कई देशों में फल फूल रही है। हम अपने स्वार्थ और लाभ के चक्कर में अपनी कला को अपनी संपत्ति बनाकर, अपने पास कैद रखेंगे तो एक दिन यह कला इतिहास के पन्नों में सिमट जाएगी। फिर मैं तो हमेशा अपने जादुई शो में भी सभी का जादू के प्रति अंधविश्वास दूर करने के लिए साफ कहता हूँ कि जादू कोई तंत्र मंत्र नहीं है। यह एक कला है जिसे हाथ की सफाई और कुछ यंत्र के माध्यम से प्रदर्शित किया जा सकता है।
‘मैजिक बॉक्स’ के माध्यम से क्या कोई भी जादूगर बन सकता है ?
जी हाँ कोई भी इसे आसानी
से सीख सकता है। मेरा मकसद यूं बच्चों को जादू कला की ओर आकर्षित करना ज्यादा है।
क्योंकि आजकल बच्चे गैजेट्स के जाल में बुरी तरह ग्रस्त हैं। हालांकि आधुनिक समय
में मोबाइल-गैजेट्स का इस्तेमाल एक जरूरत है लेकिन सीमित हद तक। यदि दिन रात हम
गैजेट्स में ही उलझे रहेंगे तो वह मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत हानिकारक रहेगा। इसलिए
मैंने अपने ‘मैजिक बॉक्स’ में 15 जादुई
खेल, विभिन्न यंत्र, जादुई पुस्तिका और
वीडियो लिंक के माध्यम से प्रस्तुत किए हैं, जिनसे बच्चे-बड़े
सभी जादूगर बन सकते हैं। इसकी तमाम जानकारी मेरी वेबसाइट जादूगर शंकर डॉट कॉम पर
उपलब्ध है।
आपके
जादू को देश विदेश के बड़े बड़े लोग देख चुके हैं। कोई ऐसी घटना जो आपको ज्यादा खुशी
देती हो ?
ऐसी बहुत सी घटनाएँ हैं जो
याद रहती हैं। विश्व प्रसिद्द जादूगर फ्रांस हरारे से जब मैं मिला तो वह मुझे देखते
ही बोले, मैंने आपका बहुत नाम सुना है। पीएम रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी साहब ने
जब मेरा शो देखा तो वह बोले, “आज तो आपने मेरा दिल खुश कर
दिया।“ मैं इसे अपना परम सौभाग्य मानता हूँ कि मेरा जादू रामनाथ कोविन्द जी, नरेंद्र मोदी जी, अमित शाह जी, राजनाथ सिंह जी, आडवाणी जी और मनोहर लाल खट्टर जी
सहित दो सौ से अधिक अत्यंत गणमान्य व्यक्ति देख चुके हैं। मेरा अब एक बड़ा ध्येय यह
है की जादू कला को लुप्त होने से बचाना है।
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