राज कपूर जैसा ‘ग्रेट शोमैन’ आज तक कोई और नहीं बन सका... राज कपूर के जन्मदिन पर मेरा विशेष लेख लोकमत समाचार के 14 दिसंबर 2020 अंक में प्रकाशित
- प्रदीप सरदाना
वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म आलोचक
राज कपूर का नाम आते ही एक शब्द जो सबसे पहले दिमाग नें उभरता है वह है ‘ग्रेट शोमैन’। यूं भारतीय सिनेमा में एक से एक शानदार फ़िल्मकार हुए हैं। लेकिन राज कपूर की फिल्मों की भव्यता इतनी थी कि आज बरसों बाद भी कोई और ‘ग्रेट शोमैन’ का दर्जा नहीं पा सका है। राज कपूर की एक खास बात यह भी रही कि वह जहां निर्माता, निर्देशक के रूप में बेहद सफल रहे वहाँ एक अभिनेता के रूप में भी उन्होंने सफलता, लोकप्रियता के कई नए आयाम बनाए।
यूं राज कपूर के पिता
पृथ्वीराज कपूर भी रंगमंच और सिनेमा के चोटी के अभिनेता थे। लेकिन राज कपूर ने
पिता के नाम की बैसाखी का सहारा लिए बिना अपनी एक ऐसी पहचान बनाई कि कपूर परिवार
फिल्म उद्योग का सबसे मशहूर परिवार बन गया। हालांकि यह वर्ष राज कपूर के परिवार और
उनके प्रशंसकों के लिए बेहद दुखदायी रहा। क्योंकि इस साल जहां पहले 14 जनवरी को राज
कपूर की बड़ी बेटी रितु नन्दा का निधन हो गया। वहाँ 30 अप्रैल को फिल्म आकाश के
चमकते सितारे, उनके बेटे ऋषि कपूर भी अलविदा कह गए।
राज कपूर देश के वह
अभिनेता भी हैं, जिन्होंने अपने देश के बाहर सबसे पहले अपने नाम
की पताका फहराई। राज कपूर की रूस में तो लोकप्रियता का आलम यह था कि उनकी फिल्म ‘आवारा’ का गीत ‘आवारा हूँ’ वहाँ घर घर में गाया जाने लगा । उन दिनों देश के प्रथम प्रधानमंत्री
पंडित जवाहर लाल नेहरू रूस गए तो वहाँ के तत्कालीन राष्ट्रपति ने पंडित नेहरू से
अपनी बातचीत में कई बार राज कपूर और उनकी
फिल्म ‘आवारा’ की बात की। पंडित नेहरू
और पृथ्वीराज कपूर के परस्पर गहरे संबंध थे। जब पंडित नेहरू स्वदेश लौटे तो
उन्होंने आते ही पृथ्वीराज से कहा, तेरे बेटे ने यह क्या
फिल्म बनाई है ‘आवारा’ कि वहाँ के
राष्ट्रपति अपनी मुलाक़ात के दौरान बार बार इस फिल्म और राज कपूर की ही चर्चा करते
रहे।
राज कपूर की रूस में
लोकप्रियता की बानगी इससे भी मिलती है कि एक बार राज कपूर को अचानक लंदन से मॉस्को
जाना पड़ा, जबकि उनके पास वहाँ के लिए वीजा भी नहीं था लेकिन रूस ने राज कपूर का
बिना वीजा भी अपने देश में स्वागत किया। राज कपूर रूस में आज भी भारतीय सिनेमा की
सबसे बड़ी पहचान बने हुए हैं।
आज राज कपूर का 96 वां
जन्म दिन है। यह बात अलग है कि उन्हें दुनिया से बिदा हुए अब 32 बरस हो चले हैं। लेकिन
राज कपूर आज भी सिनेमा का ऐसा नाम हैं, जिनके नाम के
बिना भारतीय सिनेमा अधूरा है। सन 1948 में सिर्फ 24 बरस की उम्र में राज कपूर ने
खुद निर्माता-निर्देशक बनकर पूरी सिनेमाई दुनिया को चौंका दिया था। हालांकि उनके आरके
फिल्म्स के बैनर तले बनी वह पहली फिल्म ‘आग’ बुरी तरह फ्लॉप हो गयी थी। जिसे राज कपूर का तब बहुत से लोगों ने मज़ाक भी
उड़ाया। लेकिन उन्होंने किसी भी बात की परवाह किए बिना एक साल में ही अपनी दूसरी
फिल्म ‘बरसात’ बना दी।
‘बरसात’ को तो ऐसी सफलता मिली कि राज कपूर का नाम देश के चुनिन्दा बेहतरीन
निर्माता, निर्देशकों की लिस्ट में शुमार हो गया। साथ ही
अभिनेता के रूप में भी उनकी लोकप्रियता शिखर छूने लगी। बाल कलाकार के रूप में अपनी
अभिनय यात्रा शुरू करने वाले राज कपूर ने कुल 59 फिल्मों में अभिनय किया। जबकि
अपने बैनर से बनाई अपनी कुल 18 फिल्मों में से उन्होने सिर्फ 10 फिल्मों का
निर्देशन किया। लेकिन राज कपूर अपनी इसी विरासत से आज भी अमर हैं और कल भी रहेंगे।
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