देश के पहले सुपर स्टार थे राजेश खन्ना, सफलता के भी बनाए कई सुपर रिकॉर्ड

 


राजेश खन्ना की लोकप्रियता देख, तब अपने बेटे का नाम भी राजेश रखने लगे थे लोग 

राजेश खन्ना की 78 वीं जयंती पर विशेष 

- प्रदीप सरदाना 

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक 

सन 1971 में दो फिल्में आयीं थीं,‘आनंद और अंदाज़। दोनों फिल्मों में राजेश खन्ना थे। दोनों में ज़िंदगी को लेकर ऐसे गीत थे,जो ज़िंदगी का फलसफा कहते हैं। अंदाज़ का ज़िंदगी एक सफर है सुहाना, यहाँ कल क्या हो किसने जानाआनंद का ज़िंदगी कहती है पहेली।‘’

देखें तो ये दोनों गीत राजेश खन्ना की अपनी ज़िंदगी की खुशी और दर्द, सफलता और असफलता की भी बानगी पेश करते हैं। उन्हीं राजेश खन्ना की आज 78 वीं जयंती है। 

दिलचस्प यह है कि आज उनकी बेटी ट्विंकल खन्ना का भी जन्म दिन है।राजेश-डिम्पल जैसे दो बड़े सितारों की बेटी और आज के सबसे सफल स्टार अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल भी आज 47 बरस की हो गयी हैं। बरसात, इंटरनेशनल खिलाड़ी और जुल्मी जैसी फिल्मों की नायिका रही ट्विंकल अब इंटीरियर डेकोरेशन के साथ एक स्तंभकार के रूप में नाम कमा रही हैं।

अमृतसर में 29 दिसंबर 1942 को जन्मे राजेश का असली नाम जतिन खन्ना था। दिलचस्प यह भी है कि अमृतसर में जतिन के एक बाल सखा रवि कपूर भी थे। दोनों फिल्मों के सपने देखते थे।जिनमें रवि का सपना तो पहले पूरा हो गया, वह जीतेंद्र बनकर मशहूर हो गए। जबकि जतिन 1966 में फिल्म आखिरी खत से राजेश खन्ना बनकर रुपहले पर्दे पर पहुंचे। लेकिन 1969 में शर्मिला टैगोर के साथ आई आराधना से राजेश खन्ना ने लोकप्रियता के जिस शिखर को छूआ, वहाँ फिल्म स्टार शब्द भी बौना हो गया। तब राजेश खन्ना देश के पहले सुपर स्टार बन गए।

आज सिनेमा में कई सुपर स्टार हैं। लेकिन राजेश खन्ना लड़कियों में जितना लोकप्रिय हुए,वैसा आज तक कोई और नहीं हो सका। राजेश की इस रोमांटिक छवि से उनकी मम्मी भी उनसे पूछती थीं, बेटा ऐसा क्या है कि लड़कियां तेरी फोटो से शादी कर लेती हैं। तेरी कार को भी इतनी लड़कियां चूमती हैं कि कार लिपिस्टिक के निशानों से भर जाती है।

एक तरफ लड़कियां उनकी दीवानी थीं तो तब बहुत से माता पिता भी फिल्मों में काका के नाम से मशहूर राजेश के नाम से इतना अभिभूत थे। वे भी अपने यहाँ काके का नाम राजेश रखने लगे थे। ध्यान से देखें तो सन 1969 से 1980 के बीच पैदा होने वाले लड़कों में राजे नाम के लड़के काफी मिलते हैं।

राजेखन्ना देश के ऐसे सितारे भी हैं, जिन्होंने एक समय में एक साथ चार-पाँच फिल्में करके एक नयी परंपरा को बल दिया। यह राजे खन्ना की मेहनत और लोकप्रियता का जादू था कि उन्होंने आराधनाके बाद कतार से 15 हिट फिल्में देकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे आज तक कोई और तोड़ नहीं सका है। आराधनाके बाद इत्तफाक‘, ‘डोली‘, ‘बंधन‘, ‘दो रास्ते‘, ‘खामोशी‘, ‘द ट्रेन‘, ‘सच्चा झूठा‘, ‘सफर‘, ‘कटी पतंग‘, ‘आनन्द‘, ‘आन मिलो सजना‘, ‘अंदाज‘, ‘हाथी मेरे साथी‘, ‘महबूब की मेंहदीऐसी ही फिल्में थीं।

उन्होंने अपने फिल्म करियर में करीब 175 फिल्मों में काम किया, जिनमें उनकी लगभग 100 फिल्में तो सोलो हिट रहीं। इन फिल्मों में भी करीब 70 फिल्में तो ऐसी हैं जिन्होंने सिल्वर, गोल्डन और कुछेक ने तो प्लेटिनम जुबली मनाकर सफलता का सुपर रिकॉर्ड बनाया। 

('लोकमत समाचार' में 29 दिसंबर 2020 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ नए इनपुट्स के साथ)

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