सब कुछ पाकर भी अपनी ज़िंदगी नहीं जी सकीं नन्दा

 

नंदा जन्म दिन 8 जनवरी पर विशेष

भाई बहनों को संभालते हुए बीती नंदा की ज़िंदगी 

- प्रदीप सरदाना 

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक 

हिन्दी फिल्मों के स्वर्णकाल के रूप में प्रसिद्द सन 1960 के दशक में रूपहले  पर्दे पर नन्दा, साधना और आशा पारिख तीन ऐसी अभिनेत्रियाँ थीं जिनकी दीवानगी देखते ही बनती थी। इनमें नन्दा मराठी परिवार से थीं और उनके पिता मास्टर विनायक अपने दौर के मशहूर फ़िल्मकार और अभिनेता थे। 

नन्दा ने अपने पिता के निधन के बाद 8 साल की उम्र में ही अपना फिल्मी सफर शुरू कर दिया था।हालांकि नन्दा 7 बहन भाइयों में सबसे छोटी थीं और वह पढ़ना चाहती थीं। लेकिन माँ मीनाक्षी के कहने पर, नन्दा ने ही इतनी छोटी उम्र में परिवार को आर्थिक समस्याओं से उबारने की ज़िम्मेदारी निभाई। इसे संयोग कहें या क्या कि अपनी जिंदगी के अंत यानि 25 मार्च 2014 तक अपनी 75 बरस की उम्र में भी वह अपने बहन भाइयों की जिम्मेदारियाँ संभालने में ही जुटी थीं। 

सन 1948 में फिल्म मंदिर से बेबी नन्दा के रूप में शुरू हुआ उनका अभिनय सफर, 1983 में प्रदर्शित फिल्म मजदूर तक चला। अपनी इस फिल्म यात्रा में नन्दा ने कुल 70 फिल्मों में काम किया जिनमें 10 फिल्में उनकी बाल कलाकार के नाते थीं। अपनी वयस्क भूमिकाओं की शुरुआत नन्दा ने वी शांताराम की फिल्म तूफ़ान से की थी। बाद में छोटी बहन, भाभी, बेटी, परिवार, अधिकार, नर्तकी पति पत्नी जैसी कई फिल्में नंदा ने कीं। उनकी अधिक लोकप्रिय फिल्मों में तीन देवियाँ, काला बाज़ार, हम दोनों देव आनंद के साथ हैं। तो द ट्रेन, इत्तफाक और जोरू का गुलाम राजेश खन्ना के साथ। फिर मनोज कुमार के साथ उनकी बेदाग, गुमनाम और शोर जैसी फिल्म हैं। राजेन्द्र कुमार के साथ कानून और जीतेंद्र के साथ धरती कहे पुकार जैसी उनकी फिल्मों ने भी अच्छी धूम मचाई थी।

नंदा की जोड़ी शशि कपूर के साथ तो इतनी लोकप्रिय हुई की दोनों ने कुल 8 फिल्मों में साथ काम किया। जिनमें इनकी जब जब फूल खिले तो एक मील का पत्थर है। नन्दा को फिल्म आँचल के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। उधर चरित्र भूमिकाओं में शोर के अलावा आहिस्ता आहिस्ता और प्रेम रोग भी वह काफी पसंद की गईं।

नन्दा का फिल्म सफर तो अच्छा रहा।लेकिन वह आजन्म अविवाहित ही रहीं। हालांकि उनके लिए एक से एक रिश्ते आते रहे। यहाँ तक जब वह 52 बरस की थीं तो नन्दा ने जाने माने फ़िल्मकार मनमोहन देसाई से सगाई भी की। लेकिन शादी से पहले ही देसाई दुनिया को अलविदा कह गए। इसके बाद नन्दा ने सार्वजनिक समारोह में जाना ही बंद कर दिया। उनकी बेहतरीन सहेलियों में वहीदा रहमान और आशा पारिख रहीं। आज भी आशा पारिख से जब मेरी बात होती है तो नन्दा को याद कर वह भी भाव विहोर हो जाती हैं। 

('लोकमत समाचार' में 8 जनवरी 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ इनपुट्स के साथ)

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