केएल सहगल की अंगूठी पहनकर गाना गाती थीं लता मंगेशकर

 


अमर गायक केएल सैगल की पुण्य तिथि 18 जनवरी पर विशेष 

रफी, मुकेश, किशोर सभी रहे सैगल के प्रशंसक 


प्रदीप सरदाना 

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक 

भारतीय सिनेमा में रफी, मुकेश और किशोर कुमार तीन ऐसे गायक रहे, जिनके गीतों का जादू आज भी सभी के सिर चढ़कर बोलता है। इन गायकों को दुनिया से कूच किए बरसों बीत गए, इनके बाद कितने ही और अच्छे गायक फिल्म संसार में आए। लेकिन रफी, मुकेश और किशोर की जगह कोई नहीं ले सका। लेकिन इससे भी बड़ी बात एक और भी है कि ये तीनों महान गायक खुद किसी गायक के मुरीद थे तो वह थे- कुन्दन लाल सहगल।

आज की पीढ़ी के बहुत से लोग चाहे सैगल को न जानते हों, क्योंकि सैगल का निधन 18 जनवरी 1947 को ही हो गया था। लेकिन वह भारतीय सिनेमा के सच में कुन्दन थे, एक ऐसे रत्न जिनके बारे में फिल्म और संगीत प्रेमियों को ही नहीं, सभी को जानना चाहिए। क्योंकि वह उस्तादों के उस्ताद थे। गायक-गायिका ही नहीं बड़े से बड़े संगीतकार भी उनके साथ काम करके खुद को धन्य मानते थे। रफी ने कुन्दन के साथ सिर्फ एक ही फिल्म शाहजहाँ में गीत गाया था,लेकिन वह इसे अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते रहे। मुकेश तो सहगल के इतने जबर्दस्त प्रशंसक थे कि वह उन्हीं के गीत गाते हुए आगे बढ़े। किशोर कुमार अपने बेटे अमित कुमार को कहते थे कि यदि ज़िंदगी में कुछ बनना है तो सैगल के गीत बार बार सुनो।

स्वर कोकिला लता मंगेशकर को तो आज तक इस बात का मलाल है कि उन्हें सहगल से मिलने या उनके साथ गायन का मौका नहीं मिल सका। वह सहगल की किस हद तक मुरीद रहीं उसकी मिसाल इस बात से ही मिलती है कि वह रिकॉर्डिंग के समय सैगल की एक अंगूठी पहनटी रही हैं। लता ने एक बार कहा था- मैंने सोचा सैगल साहब का कोई स्मृति चिह्न मेरे पास हो। इसके लिए मैंने उनके बेटे मदन सैगल से कहा तो उन्होंने मुझे सैगल साहब की एक अंगूठी दे दी। आज भी जब मैं फिल्म गीतों की रिकॉर्डिंग करती हूँ तो उस अंगूठी को पहन लेती हूँ। उसे पहनते ही मुझमें एक नया उत्साह आ जाता है। मैं सोचती हूँ उनकी अंगूठी का यह कमाल है तो यदि वह मेरे साथ गा रहे होते तो क्या होता।

कुन्दन लाल सहगल एक अमर गायक ही नहीं, एक महान अभिनेता भी रहे। अफसोस यह रहा कि वह सिर्फ 43 बरस तक ही जी पाये। इसमें भी उनका फिल्म करियर मात्र 15 बरस का रहा। लेकिन इतने कम समय में भी वह इतना कुछ कर गए जिसके लिए सौ बरस भी कम हैं। सैगल ने कुल 159 फिल्म गीत ही गाये। जिनमें मैं क्या जानूं क्या जादू है, बाबुल मोरा नइहर छूटो जाए, दिल ए नादां तुझे हुआ क्या है, एक बंगला बने न्यारा, गम दिये मुस्तकिल और जब दिल ही टूट गया, जैसे उनकी गीत आज 74 बरस बाद भी संगीत प्रेमियों को झकझोर कर रख देते हैं।

जहां तक फिल्मों में अभिनय की बात है तो कुन्दन ने सिर्फ 37 फिल्मों में अभिनय किया। लेकिन यहाँ भी उनकी देवदास, यहूदी की लड़की, चंडीदास, करोड़पति, प्रेसिडेंट, स्ट्रीट सिंगर और तानसेन ऐसी फिल्में हैं, जो अभिनय के विद्यार्थियों के लिए किसी स्कूल से कम नहीं। 

(लोकमत समाचार में 18 जनवरी 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ नए इनपुट्स के साथ) 

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