अभिनय सम्राट दिलीप कुमार भी थे अभिनेता ओम प्रकाश के प्रशंसक

 

पुण्य तिथि 21 फरवरी पर विशेष 

सहायक भूमिकाओं के बल पर ही ओम प्रकाश ने रचा सफलता का इतिहास 

- प्रदीप सरदाना 

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक 

हिन्दी सिनेमा ने एक से एक शानदार अभिनेता दिये हैं। लेकिन ओम प्रकाश एक ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने अपनी सहायक भूमिकाओं के बल पर भी सफलता का ऐसा इतिहास लिखा कि आज तक कोई भी और सहायक अभिनेता उनके शिखर तक नहीं पहुँच सका है। उनका लाजवाब अभिनय ऐसा था कि वह चाहे हास्य भूमिकाओं में आए या गंभीर या खलनायक की भूमिकाओं में, उनके अभिनय का जादू सभी को अपनी गिरफ़्त में ले लेता था। यहाँ तक अभिनय सम्राट दिलीप कुमार और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी उनके जबर्दस्त प्रशंसक रहे।

बेमिसाल अभिनेता ओम प्रकाश की आज 23 वीं पुण्यतिथि है। जम्मू में 19 दिसंबर 1919 को जन्मे ओम प्रकाश का 21 फरवरी 1998 को मुंबई में निधन हो गया था। 

ओम प्रकाश को एक नाटक के दौरान अभिनय का शौक ऐसा जागा कि उसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले ओम प्रकाश ने आल इंडिया रेडियो में 25 रुपए महीने पर नौकरी की। फिर 1940 के दशक की शुरुआत में उस दौर के मशहूर फ़िल्मकार पंचौली ने एक शादी समारोह में ओम प्रकाश को देखा तो उन्हें लाहौर बुलाकर अपनी फिल्म दासी में ले लिया। कुछ समय बाद देश विभाजन होने पर वह मुंबई आ गए। जहां देखते देखते वह हिन्दी सिनेमा के ऐसे सितारे बन गए कि जिनकी फिल्म में मौजूदगी से उस फिल्म में चार चाँद लग जाते थे। जिसे देखो वह अपनी फिल्मों में ओम प्रकाश को लेना चाहता था। सन 1950 से 1980 के 30 बरस तो ओम प्रकाश के करियर के गोल्डन ईयर्स थे।

अपने करीब 50 बरसों के फिल्म करियर में ओम प्रकाश ने लगभग 300 फिल्मों में काम किया। बड़ी बात यह है कि उनके करियर में 100 से अधिक ऐसी फिल्में हैं जो भुलाए नहीं भूलतीं। ओम प्रकाश के जानदार अभिनय का ही यह असर था कि उन्हें दस लाख, अन्नदाता और चरणदास जैसी फिल्मों में तो प्रमुख भूमिकाओं में लिया गया।

उधर प्यार किए जापड़ोसनजोरू का गुलामजूलीअपना देशभरोसातेरे घर के सामनेदिल दौलत और दुनिया,मेरे हमदम मेरे दोस्तआ गले लग जाबुड्ढामिल गयालोफ़रनौकर बीवी का और चमेली की शादी जैसी कितनी ही फिल्में उनके शानदार अभिनय की खूबसूरत बानगी पेश करती हैं।

अमिताभ बच्चन के साथ तो ओम प्रकाश की कई ऐसी फिल्में हैं जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। जैसे चुपके चुपके,शराबी,नमक हलाल और लावारिस।यूं ओम प्रकाश ने खुद गेट वे ऑफ इंडिया, संजोग और जहां आरा जैसी कुछ फिल्मों का निर्माण भी किया।

दिलीप कुमार के साथ ओम प्रकाश ने शिकस्त, आज़ाद, साधु और शैतान , गोपी और सगीना जैसी पाँच प्रमुख फिल्में कीं। दिलीप कुमार ने एक बार कहा था- "अपने फिल्म करियर में मुझे गोपी फिल्म में ओम प्रकाश जी के साथ काम करके लगा कि अभिनय में वह मुझसे आगे निकल गए।" 

अभी कुछ दिन पहले ही मुझे सायरा बानो ने भी अपनी एक खास बातचीत में बताया था- "ओम अंकल की हम सब बहुत इज्ज़त करते थे। जब वह अपने अंतिम दिनों में अस्पताल में दाखिल थे तो दिलीप साहब उन्हें बराबर देखने जाते थे।"

('लोकमत समाचारमें 21 फरवरी 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ इनपुट्स के साथ)

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