कपूर खानदान का परचम लहरा रहे थे ऋषि कपूर

- प्रदीप सरदाना

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म-टीवी समीक्षक 

ऋषि कपूर को दुनिया से विदा हुए आज पूरा एक साल हो गया। पिछले साल कोरोना काल में ही कैंसर से जूझते हुए वह बेशक ज़िंदगी की जंग हार गए थे। लेकिन असल में वह एक बेबाक, ज़िंदादिल और जोशीले इंसान थे।

मेरी ऋषि कपूर से कितनी ही मुलाकातें हुईं फोन और व्हाट्सएप पर भी मैं उनसे बात होती रहती थी। उनकी साफ़गोई मुझे हमेशा प्रभावित करती थी। कोई बात उन्हें अच्छी लगती तो वह उसकी खुले दिल से तारीफ करते और यदि कोई बात खराब लगती तो वह उस व्यक्ति के मुंह पर बोल देते थे चाहे वह बात उसे बुरी लगे या उससे उनके रिश्ते खराब हो जाएँ।

उधर हम ऋषि कपूर को एक अभिनेता के रूप में देखें तो वह एक ऐसे सफल, लोकप्रिय और बेहतरीन अभिनेता थे, जिनके बल पर कपूर खानदान का परचम लहरा रहा था। वह सिर्फ अपने दादा पृथ्वीराज या पिता राज कपूर का ही नहीं अपने चाचा शम्मी कपूर और शशि कपूर के नाम और उनकी परम्पराओं को आगे बढ़ा रहे थे।

जब गत 30 अप्रैल को कपूर खानदान का यह चिराग 67 बरस उम्र में ही बुझ गया तो दुनिया भर में बैठे ऋषि के प्रशंसक अपने आँसू नहीं रोक सके। ऋषि कपूर 7 महीने पहले ही 11 महीने 11 दिन बाद न्यूयॉर्क से अपना इलाज़ कराके लौटे थे। उसके बाद उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग भी शुरू कर दी थी और राजनीति,पीएम मोदी और कोरोना जैसे मामलों पर ट्वीटर पर अपनी बेबाक टिप्पणियाँ भी जमकर लिख रहे थे। अपने निधन से 40 दिन पहले ऋषि ने यह भी लिखा था, “आजकल कुछ कपूर लोगों पर समय भारी है। डरता हूँ। हे मालिक रक्षा करना।“ लेकिन शायद मालिक ने उनकी नहीं सुनी। ऋषि कपूर को तो अलविदा कहना ही पड़ा। ऋषि से तीन महीने पहले उनकी बड़ी बहन ऋतु नन्दा और ऋषि के 9 महीने बाद इसी साल 9 फरवरी को उनके छोटे भाई राजीव कपूर भी चल बसे। इधर ऋषि की एक दिली इच्छा थी कि उनके रहते उनके बेटे रणबीर कपूर की शादी हो जाये लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

यूं ऋषि कपूर ने अपनी ज़िंदगी को भरपूर और अपने अंदाज़ में जिया। अपने 50 साल के फिल्म करियर में ऋषि ने एक से एक नायाब फिल्म की। ऋषि की फिल्म बड़े दिलवाला का एक गाना मानो उनकी ही बात कह रहा हो–''जीवन के दिन छोटे सही, हम भी बड़े दिल वाले।''  

('लोकमत समाचारमें 30 अप्रैल  2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ इनपुट्स के साथ)

प्रदीप सरदाना    

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