विधानसभा चुनावों में और भी मजबूत हुई भाजपा

प्रदीप सरदाना

वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक 

पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों के पश्चात, कुछ ऐसी हवा बनाई जा रही है कि इन चुनावों में भाजपा को करारी हार मिली है। ऐसी हवा जहां कुछ विपक्षी दल बना रहे हैं, वहाँ मीडिया का एक वर्ग भी यही साबित करने में लगा है कि नरेन्द्र मोदी का जादू इस बार नहीं चला। लेकिन यदि चुनाव परिणामों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो भाजपा इन चुनावों में और भी मजबूत होकर उभरी है। पिछले विधानसभा चुनावों से उसे इस बार कहीं अधिक सफलता प्राप्त हुई है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू भी कायम है।

भाजपा की हार पहली नज़र में कुछ लोगों को सिर्फ इसलिए लगती है क्योंकि भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनाने में सफल नहीं हो सकी। यह ठीक है कि ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री बन गईं। लेकिन इस पूरे चुनावी परिदृश्य को ध्यान से देखें तो इन पांचों राज्यों के 2016 के पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में, इस बार भाजपा सफलता के मामले में और भी आगे बढ़ गयी है। 

          पुद्दुचेरी से दक्षिण क्षेत्र में नयी सफलता  

इन पाँच राज्यों के चुनावों से पहले भाजपा की सिर्फ एक राज्य असम में ही सरकार थी। अब चुनावों के बाद असम में तो भाजपा की सरकार फिर से बनी ही। साथ ही अब भाजपा-एनडीए के पास एक और राज्य पुद्दुचेरी भी आ गया है। पुडुचेरी में पिछली बार कॉंग्रेस सरकार थी। लेकिन इस बार वहाँ कॉंग्रेस सिर्फ 2 सीट पर सिमट गयी। जबकि पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों पर 2016 में भाजपा के पास एक भी सीट नहीं थी। लेकिन 2021 के इन चुनावों में भाजपा ने सिर्फ 9 सीटों पर चुनाव लड़कर, 6 सीटों पर विजय पाकर, पुडुचेरी में सफलता का नया इतिहास लिख दिया है। साथ ही इन चुनावों में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने पर एनडीए के घटक दल ऑल इंडिया एनआर कॉंग्रेस को भी पिछली बार की 8 सीटों के मुक़ाबले, इस बार 10 सीटें मिलीं हैं। इससे पुडुचेरी में कुल 16 सीट पाकर पहली बार एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला। इससे भाजपा की दक्षिण क्षेत्र में यह एक नयी कामयाबी है। जिसका कुछ न कुछ लाभ भाजपा को भविष्य में तमिलनाडु में भी हो सकता है।

             तमिलनाडु में शून्य से चार पर

इधर तमिलनाडु में भी भाजपा को इन चुनावों में पहली बार कुछ सफलता मिली है। सन 2016 के विधानसभा चुनावों में भाजपा यहाँ सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़कर एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। लेकिन इस बार भाजपा ने यहाँ जयललिता की पार्टी एआईडीएमके साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। जहां एआईडीएमके तो इस बार पिछड़ गयी लेकिन भाजपा ने इस बार सिर्फ 20 सीट पर चुनाव लड़कर 4 सीटों पर विजय पाकर दिखा दिया कि वह तमिलनाडु में भी अपनी जगह बनाने में सफल हो रही है। भाजपा को यहाँ एक बड़ी सफलता यह भी मिली कि हमेशा भाजपा और नरेंद्र मोदी के कट्टर विरोधी रहे, मशहूर अभिनेता कमल हासन को भी मुंह की खानी पड़ी। भाजपा की वानती श्रीनिवासन ने कोयंबटूर साउथ सीट से कमल हासन को हरा कर उनके सपनों को चूर चूर कर दिया। तमिल सिनेमा सहित भारतीय सिनेमा का इतना लोकप्रिय कमल भाजपा के कमल के सामने बुरी तरह मुरझा गया। उनकी  मक्कल निधि मय्यम पार्टी को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली।

                केरल में भी बढ़ा मत प्रतिशत

बात केरल की करें तो यहाँ भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। जबकि पिछली बार यहाँ एनडीए की एक सीट थी। हालांकि भाजपा में आए 88 वर्षीय मेट्रो मैन ई श्रीधरन, पल्लकड़ सीट से शुरू से बढ़त बनाए हुए थे। लेकिन अंतिम दौर में वह हार गए। परंतु भाजपा को केरल में भी 2016 के मुक़ाबले इस बार ज्यादा वोट मिले। पहले भाजपा को यहाँ कुल 2129726 वोट मिलने से उसका मत प्रतिशत 10.53 था। लेकिन इस बार भाजपा ने पहले से अधिक कुल 2354468 मत पाकर अपना मत प्रतिशत 11.30 तक बढ़ा दिया।

              असम में फिर बनी भाजपा सरकार

उधर असम विधानसभा में भी भाजपा पिछली बार से अधिक सफल हुई है। हालांकि असम को लेकर कुछ लोग दावे कर रहे थे कि एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों के चलते वहाँ भाजपा सरकार नहीं बना पाएगी। लेकिन भाजपा ने इस तरह के विरोध के बावजूद इस बार भी पिछली बार की तरह कुल 60 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। यूं भाजपा के सहयोगी दल असम गण परिषद और बोड़ोलैंड पीपल्स फ्रंट पिछली बार की 26 सीट के स्थान पर इस बार 15 सीट पर ही विजय पा सके। इससे एनडीए की 11 सीट कम हो गईं। लेकिन भाजपा की सीटों पर जरा भी असर नहीं पड़ा। बल्कि भाजपा ने यहाँ भी अपना मत प्रतिशत बढ़ाया। 2016 में भाजपा को यहाँ 29.50 प्रतिशत मत मिले तो इस बार 33.01 प्रतिशत मत। 

     

पश्चिम बंगाल में मिली 25 गुना सफलता  

अब पश्चिम बंगाल पर आते है। जहां भाजपा ने 2016 के मुक़ाबले इस बार दमदार सफलता पायी है। 2016 के चुनाव में यहाँ भाजपा के पास मात्र 3 सीट थीं। लेकिन 2021 में भाजपा को यहाँ 77 सीट मिल गईं हैं। जो पिछली बार से 25 गुना अधिक है। लेकिन इस शानदार विजय के बाद भी इसे भाजपा की करारी हार बताकर मज़ाक उड़ाया जा रहा है। यह जरूर है कि पश्चिम बंगाल में लग रहा था कि भाजपा यहाँ सरकार बना लेगी। भाजपा ने भी यहाँ 200 सीट का लक्ष्य रखा था। पर ऐसे लक्ष्य भाजपा न रखती तो पश्चिम बंगाल के ममता बनर्जी के आतंक वाले राज्य में भाजपा को इतनी सीट कैसे मिलतीं ! लेकिन ममता के चुनावी रणनीतिकार और खुद को राजनीति का चाणक्य बताने वाले प्रशांत किशोर का दावा था कि भाजपा को यहाँ दो डिजिट में भी यानि 10 सीट भी नहीं मिलेंगी। फिर भी भाजपा ने यहाँ 77 सीट पाने के साथ अपना वोट प्रतिशत 38.1 करते हुए कुल 2 करोड़ 28 लाख 50 हज़ार 710 वोट प्राप्त करके यहाँ अपनी बहुत बड़ी उपस्थिती दर्ज कराई है

                                       और भी कई लाभ

जबकि तृणमूल कॉंग्रेस को इस बार कुल 2 करोड़ 87 लाख 35 हज़ार 420 वोट मिले हैं। लेकिन भाजपा को पश्चिम बंगाल में इस बार तीन बड़ी कामयाबी यह भी मिली हैं कि एक तो तृणमूल चाहे फिर से सरकार बना गयी लेकिन खुद ममता भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी से मात खाकर अपनी ही सीट हार गईं। दूसरा भाजपा को इस जीत से राज्यसभा में अपनी एक से दो सीट की बढ़ोतरी हो जाएगी। तीसरा भाजपा ने पश्चिम बंगाल से उस कॉंग्रेस और वाम दलों का सफाया कर दिया जिन्होंने करीब 60 बरसों तक यहाँ सत्ता संभाली। भाजपा अब पश्चिम बंगाल में इकलौता और प्रबल विपक्षी दल बन गया। ये सभी आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि इन विधानसभा चुनावों में भाजपा और भी सशक्त होकर उभरी है। 

(प्रसिद्ध समाचार पत्र हरिभूमि में 9  मई 2021 को सभी संस्करण में प्रकाशित मेरा लेख कुछ नए इनपुट्स के साथ )

प्रदीप सरदाना    

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