सिनेमा के पहले बेताज बादशाह थे महबूब खान
- प्रदीप सरदाना
वरिष्ठ पत्रकार एवं
विश्लेषक
‘मदर इंडिया’ एक ऐसी फिल्म है जिसकी गिनती भारतीय सिनेमा की तीन सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में
होती है। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा की दशा और दिशा दोनों बदल दी थीं। नर्गिस जैसी
शानदार अभिनेत्री ने राज कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ एक से एक सुपर हिट फिल्म
दी। लेकिन नर्गिस को एक बेहतरीन अभिनेत्री के रूप में जिस फिल्म से दुनिया भर में
मान्यता और अपनी एक विशिष्ट पहचान मिली वह ‘मदर इंडिया’ थी।
फिल्म इतिहास की इस अविस्मरणीय
फिल्म का निर्माण और निर्देशन महबूब खान ने किया था। ‘मदर इंडिया’(1957) को जहां फिल्मफेयर और राष्ट्रीय
पुरस्कार मिले, वहाँ यह ऑस्कर के लिए भी नामांकित हुई। महबूब
खान की एक बड़ी खासियत यह भी थी कि वह हमेशा समय से आगे सोचते थे। महबूब ने 1952
में ही देश की पहली टेकनीकलर फिल्म ‘आन’ बनाकर सभी को चौंका दिया था। ‘आन’ देश की ऐसी पहली फिल्म भी थी जिसका वर्ल्ड प्रीमियर लंदन में हुआ था। इसी
के बाद भारतीय सिनेमा को विदेशों में बड़ा बाज़ार मिला।
साथ ही महबूब ने उसी दौर
में मुंबई के बांद्रा में अपना भव्य ‘महबूब स्टूडियो’ बनाकर हॉलीवुड के फ़िल्मकारों को भी
हैरत में डाल दिया था। महिला प्रधान फिल्मों की बात हो या भव्य सेट्स सभी में
महबूब खान आगे रहते थे। महबूब ने अपने करियर में करीब 25 फिल्मों का निर्देशन
किया। जिनमें रोटी, हुमायूँ, तकदीर, औरत, एक ही रास्ता, अनमोल घड़ी, अनोखी अदा, अंदाज़, अमर, जैसी कई यादगार फिल्में हैं। इनकी फिल्मों का संगीत भी इतना उम्दा रहा कि
आज तक उनकी फिल्मों के गीत भुलाए नहीं भूलते। नौशाद उनके पसंदीदा संगीतकार ही नहीं
अच्छे दोस्त और सलाहकार भी थे। वहाँ दिलीप कुमार, राज कपूर, राजेन्द्र कुमार, सुनील दत्त,
नादिरा, सुरेन्द्र, और कन्हैया लाल
जैसे कई ऐसे कलाकार हैं जिनके फिल्म करियर को महबूब ने एक नयी मंजिल दी।
गुजरात के बिलिमोरा में 9
सितंबर 1907 को जन्मे अपने फिल्म करियर की शुरुआत बतौर अभिनेता 1931 में तब ही कर
दी थी जब देश में सवाक फिल्मों का युग शुरू हुआ था। लेकिन जल्द ही महबूब ने अभिनय
की दुनिया की जगह फिल्म निर्माण और निर्देशन को अपना लिया। उनकी अंतिम फिल्म ‘सन ऑफ इंडिया’ थी। जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित
नेहरू ने भी देखा था।
हालांकि महबूब की ज़िंदगी सिर्फ
57 बरस की रही। लेकिन अपनी इस छोटी ज़िंदगी में भी, अपनी बड़ी
फिल्मों के चलते, वह उस दौर में भारतीय सिनेमा के पहले बेताज
बादशाह बन गए थे। आज भी हम देश के दस दिग्गज फ़िल्मकारों की बात करें तो महबूब साहब
का नाम उस सूची में अलग ही चमकता दिखाई देता है।
(प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘लोकमत समाचार’ में 28 मई 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ नए इनपुट्स के साथ )
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