हरियाणवी संस्कृति और सिनेमा के लिए समर्पित रहे ओ पी हरियाणवी
- प्रदीप सरदाना
वरिष्ठ
पत्रकार एवं समीक्षक
ओ पी हरियाणवी देश की एक
ऐसी शख्सियत थे जो पिछले करीब 50 बरसों से हरियाणा की कला, संस्कृति और हरियाणवी फिल्मों के लिए समर्पित थे। लेकिन कोरोना महामारी का यह भयावह काल, बहुमुखी प्रतिभा के धनी ओ पी हरियाणवी को भी हमसे छीन गया।
कई हिट हरियाणवी फिल्मों
के निर्माता,अभिनेता जाने माने कवि और गीतकार ओ पी हरियाणवी
का कल 4 मई को कोरोना के चलते पूर्वी दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशिलिटी
अस्पताल में निधन हो गया।
फिल्म 'दस्तक' में बने थे शाहरुख खान के बॉस
ओ पी जैन हरियाणवी पिछले
कई बरसों से हरियाणा और दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में आयोजित होने वाले कवि
सम्मेलनों का विशेष आकर्षण हुआ करते थे। साथ ही वह हिन्दी और हरियाणवी फिल्मों के
साथ कई गैर फिल्मी एलबम के लिए भी लगातार गीत लिखते रहे । जैन भजन, बाबोसा भजन और भगवान कृष्ण, भगवान शिव और माँ
दुर्गा पर लिखे भजनों के साथ उनके प्रेम सामाजिक संदेश और राजनैतिक रंग में रंगे
गीत भी काफी पसंद किए जाते रहे लगभग 400
गीतों-भजनों के रचयिता ओ पी हरियाणवी के लिखे गीतों को जहां रवीद्र जैन और
कल्याणजी आनंदजी जैसे कै प्रमुख संगीतकारों ने अपनी धुनों से सजाया वहाँ शाहरुख
खान की दो टेली फिल्म ‘अधूरी ज़िंदगी’
और ‘दस्तक’ के गीत भी हरियाणवी ने
लिखे। ‘दस्तक’ में तो उन्होंने शाहरुख
खान के बॉस की भूमिका भी निभाई थी। जबकि हरियाणवी फिल्मों का तो वह एक बड़ा नाम थे।
हरियाणवी फिल्मों का बड़ा नाम
कभी उनके बारे में कहा जाता था कि कोई भी हरियाणवी फिल्म ओ पी हरियाणवी के बिना पूरी नहीं हो सकती। अपनी बेमिसाल प्रतिभा के लिए ओ पी हरियाणवी को 1989 में तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री एच के एल भगत ने ‘आधारशिला’ जैसे बड़े पुरस्कार और 1999 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने ‘प्रतिभा’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। पिछले दिनों हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी उन्हें गुरुग्राम के एक समारोह में सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार दिया था। उधर सोनी सब टीवी पर देश के चुनिन्दा कवियों के मशहूर और दिलकश कार्यक्रम ‘वाह वाह क्या बात’ में भी जब ओ पी हरियाणवी गए तो वहाँ भी इन्हें बहुत सम्मान मिला।
27 मई 1999 को पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से प्रतिभा पुरस्कार लेते ओ पी हरियाणवी। चित्र के मध्य में हैं वरिष्ठ पत्रकार, फिल्म समीक्षक और 'पुनर्वास' संपादक प्रदीप सरदाना
पानीपत हरियाणा के राजा खेड़ी में 6 दिसंबर 1949 को पूर्ण चंद जैन के यहाँ जन्मे ओम प्रकाश जैन अपनी किशोरावस्था से ही गीत संगीत और धार्मिक तथा सामाजिक कार्यों में रुचि लेते थे। जब ओमप्रकाश जैन ने ओ पी हरियाणवी बनकर मंच से अपनी कविताओं को सुनाना शुरू किया तो श्रोताओं में वह जल्द ही लोकप्रिय हो उठे। आगे चलकर सन 1984 में ओपी हरियाणवी ने अपने छोटे भाई मदन जैन के साथ मिलकर ‘महारा पीहड़ सासरा’ फिल्म बनाई तो यह हिट हो गयी। इसके बाद हरियाणवी ने ‘गुलाबो’ और फिर ‘ज़र जोरू और ज़मीन’ जैसी कुछ और हरियाणवी फिल्में अलग अलग लोगों के साथ मिलकर बनायीं तो वे सुपर हिट रहीं। इन दोनों फिल्मों में भी ओपी ने अभिनय किया और गीत भी लिखे।
ओ पी हरियाणवी के लिखे कई
फिल्म गीत काफी लोकप्रिय हुए। जिनमें रवीद्र जैन का गाया –‘सदा रहीं सै सदा रहेंगी झगड़े की जड़ तीन, ज़र जोरू और
ज़मीन’, महेंद्र कपूर का गाया ‘रिश्ता न
कोई करियो अपने तै बड़े घर में’ और सुरेश वाडेकर, हेमलता का गाया देवर–भाभी की छेड़ छाड़ वाला गीत जो आज भी हरियाणा में शादी
और अन्य समारोह मे खूब गाया बजाया जाता है। जिसमें भाभी देवर से कहती है- ’मेरे पाछे पाछे आवण का भला कौनसा मतबल तेरा सै’ तब
देवर जवाब देता है- मैनने कै पूच्छे भाबी तैन्ने सब बातों का बेरा सै’। साथ ही शाम भटेजा का गाया ‘नशा तो है मौत की
निशानी’ और भाल सिंह का गाया ‘मेरे दिल
पर लिख दिया नाम गुलाबो छोरी ने’ भी इनके लोकप्रिय गीत हैं।
यूं इनके गीतों को कविता कृष्णमूर्ति और सविता साथी जैसी कुछ और मशहूर गायिकाओं ने
भी गाया है।
इधर उनके लिखे दो गीत जल्द
प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘दादा लखमी’ में भी हैं और एक पंजाबी फिल्म ‘सेल्यूट’ के लिए भी उन्होंने हाल ही में गीत लिखे थे। ओपी हरियाणवी के निधन पर
लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों की संस्था
‘आधारशिला’ ने शोक प्रकट करते हुए कहा
है-‘’हरियाणवी जी हरियाणा संस्कृति की शान थे। उनके निधन से
हरियाणा का एक और सच्चा व अच्छा सपूत चला गया।‘’ हरियाणवी
फिल्मों के प्रसिद्द निर्देशक अरविंद स्वामी और फ़िल्मकार रामपाल बलहारा भी ओ पी
हरियाणवी के निधन से बेहद दुखी हैं। उधर बालाजी बाबोसा मंदिर दिल्ली की परम आराधिका
मंजु बाइसा और मंदिर प्रमुख प्रकाश कोठारी कहते हैं- ‘’ओ पी
जी जब भी मंदिर में आकर अपने लिखे भजन खुद गाकर सुनाते थे तो पूरा वातावरण भक्तिमय
हो जाता था।‘’
गत 4 अप्रैल को ही देखा था 'दादा लखमी' फिल्म का विशेष शो
प्रसिद्द फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा बताते हैं- ‘’मेरे निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘दादा लखमी’ के समय उनके गीत लिखने का उत्साह और प्रतिभा देख मैं दंग था। वह सभी तरह के गीत लिख लेते थे प्रेम के, विरह के, देश भक्ति के, प्रेरणा के और धार्मिक गीत भी। हमारी फिल्म में भी उनका एक गीत माँ दुर्गा पर है। अभी गत 4 अप्रैल को जब दिल्ली के हंसराज महाविद्यालय में हमने ‘दादा लखमी’ का विशेष शो किया तब भी ओ पी हरियाणवी वहाँ आए थे।‘’
लेकिन क्या पता था कि पूरे एक महीने बाद 4 मई को वह दुनिया से ही चले जाएँगे। उन्हें बारं बार नमन ।
( 'हरिभूमि' में 5 मई 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ इनपुट्स के साथ)
प्रदीप सरदाना
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