फिर भी कई सच दिखा गया सुशांत का मामला

 


-प्रदीप सरदाना

वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक 

पिछले बरस 14 जून दोपहर को जब यह खबर वायरल हुई कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या कर ली है तो सभी अवाक रह गए थे। जिस सुशांत का फिल्म करियर पिछले कुछ बरसों से नित नयी उड़ान भर रहा था। अपनी काई पो छे’,‘एम एस धोनी’,‘छिछोरे’,’पीके और केदारनाथ जैसी फिल्मों से जिसने अपने नाम और काम की धूम मचा दी थी। इस तरह के उभरते सितारे का सिर्फ 34 बरस की उम्र में इस तरह जाना एक ऐसी पीड़ा थी, जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

इसलिए सुशांत के ऐसे अंत ने सभी को अशांत कर दिया। आवाज़ उठी कि सुशांत ने आत्महत्या नहीं की उसकी हत्या हुई है। सुशांत के परिवार वालों सहित कुछ और लोगों ने भी ऐसे आरोप लगाए। सुशांत की गर्ल फ्रेंड रिया चक्रवर्ती तो सीधे निशाने पर रही। कंगना रानौत, अर्चना लोखंडे और शेखर सुमन जैसे फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों के साथ, कई राजनेताओं ने भी सुशांत के पक्ष में बोलकर कई बड़े बड़े लोगों पर आरोप लगाए। करीब 4 महीने तो यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया में ऐसी सुर्खी बना रहा कि कोरोना जैसी महामारी की चिंता भी पीछे छूट गयी।

कुछ टीवी चैनल्स तो सुशांत मामले की धमाकेदार कवरेज के चलते टीआरपी में नंबर वन बन गए। महाराष्ट्र पुलिस के साथ सुशांत केस की जांच बिहार पुलिस तक ने भी। लेकिन मामला इतना बढ़ा कि सुशांत केस को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई को सौंपना पड़ा। यहाँ तक सीबीआई के साथ प्रवर्तन निदेशालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी इस जांच में लंबे समय तक लगे रहे। दीपिका पादुकोण,श्रद्धा कपूर और सारा अली खान जैसी प्रसिद्द अभिनेत्रियों तक को एनसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया। इसको लेकर महीनों तक बड़े बड़े कई हंगामे हुए। लेकिन अफसोस यह है कि आज एक साल बाद भी मामला वहीं का वहीं हैं, जहां एक साल पहले था।

सुशांत ने आत्महत्या की या उनकी हत्या हुई यह सवाल आज भी बरकरार है। यूं जांच एजेंसी इसे आत्महत्या ही मान रही हैं। लेकिन यदि यह आत्महत्या ही थी तो महीनों तक कितने ही लोगों की धड़ पकड़ क्यों होती रही। कितने ही बड़े लोगों को घंटों पूछ ताछ के लिए बुलाया जाता रहा। प्याज की परतों की तरह एक के बाद एक परतें तो निकलती गईं। लेकिन अंत में आँसू ही हाथ लगे।

यूं चाहे सुशांत सिंह राजपूत के मामले का सच सामने न आया हो। लेकिन इस मामले ने चकाचौंध की फिल्मी दुनिया के पीछे के काले सच को जरूर सामने ला दिया। फिल्मों में बड़ी मछली किस तरह छोटी मछलियों को निगलने की कोशिश करती हैं। भाई भतीजावाद यहाँ कितना हावी है। फिल्म उद्योग के  कुछ मशहूर और बड़े निर्माता और सितारे अपने हिसाब से किस तरह पूरी फिल्म इंडस्ट्री को अपने चंगुल में लिए हुए हैं। सफलता मिलने और स्टार बनने के बाद कोई कैसे चक्रव्यूह में फंस जाता है। जिन अभिनेत्रियों की दीवानगी देखते ही बनती है उनमें से कुछ किस तरह ड्रग्स के मायाजाल में उलझी हैं। फिल्म उद्योग में नशे का कारोबार कितने व्यापक स्तर पर चल रहा है। जिनको दर्शक अपना आइडल, अपना आदर्श मानते हैं वे असल में आदर्श से कोसों दूर हैं। फिल्मी दुनिया बाहर से बेशक चमकती दमकती दिखती है लेकिन उसके भीतर एक ऐसी काली स्याह दुनिया है, जिसके अंधेरे में न जाने और कितने ही सुशांत लुप्त हो रहे हैं। 

(प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘लोकमत समाचार’ में 14 जून 2021 को प्रकाशित मेरा लेख कुछ नए इनपुट्स के साथ 

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