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जब काजोल अचानक रो पड़ी...

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  आज भी याद आता है काजोल का वह पहला इंटरव्यू -   प्रदीप सरदाना     वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक    बात 1991 की है। दिल्ली में काजोल की पहली फिल्म ‘ बेखुदी ’ की शूटिंग चल रही थी। उसी दौरान फिल्म के निर्देशक राहुल रवेल ने काजोल से मिलवाने के लिए दिल्ली के कुछ चुनिन्दा पत्रकारों को   आमंत्रित किया। इसके लिए दिल्ली के कुतब होटल में शाम को एक खास पार्टी का आयोजन किया गया। पार्टी में तनूजा के साथ खड़ी बेहद साधारण , सांवली सलोनी एक लड़की से मुलाकात कराते हुए राहुल ने कहा यह तनूजा जी की बेटी काजल है , हमारी फिल्म की हीरोइन। (शुरू में काजोल को काजल ही कहते थे) मुझे उससे मिलते ही हैरानी हुई कि इतनी बड़ी स्टार तनूजा की लड़की में कोई ग्लैमर नहीं। अभी बाकी मेहमानों ने आना था , डिनर में भी देर थी तो मैंने काजल को अपना विजिटिंग कार्ड देते हुए कहा आइये आपको इंटरव्यू किया जाए। काजल ने मुस्कुराते हुए कहा –श्योर। होटल के हॉल में डिनर के लिए , एक कनात लगाकर हॉल का विभाजन किया हुआ था। बात आराम से हो सके इसके लिए मैं और काजल एकांत में कनात के दूसरी ओर रखी हुई कुर...

अनूप जलोटा : बरसों बाद भी कायम है लोकप्रियता

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-   प्रदीप सरदाना     वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक     अनूप जलोटा अपनी भजन गायकी के लिए तो पूरे विश्व में इतने मशहूर हैं कि उन्हें ‘ भजन सम्राट ’ कहा जाता है। लेकिन संगीत के साथ फिल्म-टीवी की दुनिया में भी जलोटा बहुत काम कर चुके हैं। जिनमें फिल्मों में गायन और संगीत निर्देशन से लेकर अभिनय यहाँ तक फिल्म निर्माता के रूप में भी उनका सफर काफी दिलचस्प है। फिर सन 2018 में ‘ बिग बॉस -12’ के प्रतियोगी के रूप में तो वह इतने चर्चित हुए कि सभी उनको देख दंग रह गए। साथ ही पीछे  वह ‘ पाताल लोक ’ सीरीज मेँ भी एक राजनीतिज्ञ की भूमिका मेँ आए। सन 1953 मेँ नैनीताल में जन्मे अनूप जलोटा अब इस 29 जुलाई को , 69 बरस के रहे हैं। आश्चर्य यह है कि 69 बरस की उम्र में संगीत की दुनिया का उन्हें 61 बरस का अनुभव है। उधर इतनी उम्र मेँ भी उनका जोश , उत्साह और उमंग देखते ही बनती है। जलोटा बताते हैं- ‘’ अपनी उम्र के 69 वें पड़ाव पर पहुँच में बहुत खुश हूँ। मज़े में हूँ , आनंद में हूँ। मुझे पिछले साल संगीत में 60 बरस हो गए हैं। मैं 7-8 बरस का था जब मैंने पहली बार स्टेज पर अपना क...

द्रौपदी के राष्ट्रपति प्रत्याशी बनने से संकट में विपक्ष

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  - प्रदीप सरदाना वरिष्ठ पत्रकार एवं विश्लेषक    भारतीय जनता पार्टी-राजग ने जानी मानी आदिवासी महिला नेता द्रौपदी मुर्मु को राष्ट्रपति चुनाव में , अपना प्रत्याशी बनाकर , किसी आदिवासी को राष्ट्रपति बनाने की राह प्रशस्त कर दी है। साथ ही भाजपा के इस कदम से समूचा विपक्ष भी सकते में आ गया है। विपक्ष कुछ देर पहले यशवंत सिन्हा को अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर , अपनी संयुक्त विपक्ष की एकता का दम भर रहा था। लेकिन द्रौपदी मुर्मु के आने से अब विपक्ष के सामने बड़ा धर्म संकट खड़ा हो गया है। पिछले कुछ बरसों में कुछ लोग यह इच्छा जताते रहे हैं कि भारत में अब किसी आदिवासी को राष्ट्रपति बनाना चाहिए। क्योंकि भारत के इस शिखर पद पर दो बार दलित , तीन बार मुस्लिम , एक बार सिख और एक बार महिला सहित भारत के पूर्व , पश्चिम , उत्तर , दक्षिण के व्यक्ति राष्ट्रपति बनते रहे हैं। लेकिन आदिवासी समुदाय से अभी तक कोई राष्ट्रपति नहीं बना। अब यदि विपक्ष द्रौपदी मुर्मु का समर्थन न करके यशवंत सिन्हा के साथ खड़ा रहता है तो इससे यही संदेश जाएगा कि विपक्ष आदिवासियों के कल्याण और उत्थान की तो बहुत बातें कर...

अमृत महोत्सव से बदलेगा रंगमंच का परिदृश्य

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- प्रदीप सरदाना    वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक   आज़ादी के अमृत महोत्सव के बहाने देश बरसों बाद रंगमंच के रंगों से महक उठेगा। देश का सबसे प्रतिष्ठित ‘ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ’ पहली बार नाटकों को व्यापक स्तर पर , देश में दूर दूर तक ले जाने की बड़ी तैयारी में है। इस नाट्योत्सव से ‘ आज़ादी के अमृत महोत्सव ’ के आयोजन में रंगमंच अपना विशिष्ट योगदान तो देगा ही। साथ ही साइबर क्राइम की रोकथाम और जागरूकता में भी अहम भूमिका निभाएगा। इतना ही नहीं कुछ नाटक रक्त दान के लिए प्रेरित करने के साथ लोगों को उन स्वतन्त्रता सेनानियों के बलिदान का भी स्मरण कराएंगे , जिन्होंने देश के लिए शहीद होकर अपना खून बहा दिया था।   आज़ादी से पहले देश ने वह दौर अच्छे से देखा है , जब गांवों से शहरों , महानगरों तक नाटक-नौटंकियों की धूम थी। नाटक मनोरंजन का बड़ा माध्यम होने के साथ , जन जागरूकता के मामले में भी अग्रणी थे।आज़ादी के आंदोलन में कई नाट्य समूहों के साथ आमजन भी जगह जगह नाटक-नाटिकाएँ करके लोगों को आज़ादी के आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित करते थे। यह सब देखते हुए बहुत सी नाट्य मंडलियों ...

नयी फिल्म - प्रेम में मिलने,बदलने और बिछुड़ने की कथा ‘चित्रकूट’

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प्रदीप सरदाना   वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक   न्यूयॉर्क , विएना और इटली में आयोजित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में अपने प्रदर्शन के दौरान अच्छी चर्चा बटोर चुकी फिल्म ‘ चित्रकूट ’ अब 20 मई को भारत में प्रदर्शित होने जा रही है। इस फिल्म की एक खास बात यह है  ईरान के दिग्गज फ़िल्मकार माजिद मजीदी ने तो इस फिल्म की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए , इसे नए निर्देशक की शानदार फिल्म बताया है। माजिद ईरान के ऐसे पहले फ़िल्मकार हैं , जिन्हें अपनी ‘ चिल्ड्रेन ऑफ हैवन ’, ‘ द कलर ऑफ पेराडाइज़ ’ और ’ बियोंड द क्लाउडस ’ जैसी फिल्मों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्टार पर ख्याति मिली। फिल्म ‘ चित्रकूट ’ की बात करें तो इसका निर्माण , निर्देशन और लेखन हिमांशु मलिक ने किया है। हिमांशु की यह निर्माता-निर्देशक के रूप में चाहे पहली फिल्म है। लेकिन फिल्मों से उनका अभिनेता के रूप में नाता करीब 25 बरस पुराना है। हिमांशु को सर्वाधिक लोकप्रियता सन 2001 में प्रदर्शित फिल्म ’ तुम बिन ’ से मिली थी। इस खूबसूरत फिल्म में नायिका संदली सिन्हा के साथ तीन नायक थे-प्रियान्शु चटर्जी , हिमांशु मलिक...